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अल्लाह ने मनुष्यों को बनाया और उनके पास नबी और पैगंबर भेजे, और चमत्कारों के साथ उनका समर्थन किया ताकि वे चमत्कार इस बात पर संकेत करें कि वे पैगंबर जिस चीज़ और कार्य की ओर बुला रहे हैं वह सच और सही है, और ताकि वे चमत्कार लोगों पर हुज्जत (प्रमाण) हो जाऐं ताकि कोई व्यक्ति यह न कह सके कि हमारे पास (अल्लाह के अज़ाब से) कोई डराने वाला नहीं आया, और न ही कोई पैगंबर आया ताकि हमें अच्छाई का रास्ता वताता और बुराई से मना करता, पैगंबर और नबी सबसे अच्छे लोग हैं। अल्लाह ने उन्हें चुना ताकि वे ( लोगों तक ) उसका संदेश पहुंचाऐं, और उन्हें अल्लाह की एकता बयान करने की ओर बुलाऐं और उन्हें शिर्क, कुफ्र और गुनाह से डराऐं। सबसे अंतिम पैगंबर व नबी हज़रत मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) सबसे अच्छे नैतिकता वाले मानव थे, जैसा कि अल्लाह ने अपने नबी (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) की नैतिकता को बयान करते हुए फरमाया :

(और बेशक तुम्हारे एख़लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं )

अतः पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम ) की महानता का उनके स्वयं गुणों,उनकी शुद्धिकरण उनकी उच्च नैतिकता के माध्यम से पता चलती है, अत: पैगंबर (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) का व्यक्तित्व और उनकी दुरस्ती और सुधार सभी व्यक्तित्व और सुधार से अधिक है, उनके कर्म सभी के कर्मों से अच्छे थे फोक़ियत ले गये, और वह सारी मानवजाति के लिए दयालुता और उसके सबसे बड़े सुधारक हैं, पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम = उन पर अल्लाह की दयालुता हो) ने राजाओं की तरह घातक युध्द या मानवजाति को गुलाम बनाने का संदेश नहीं दिया बल्कि वह तो अपने अल्लाह की ओर से एक ऐसा सदेंश लाये जिसका लक्ष्य दयालुता, और लोगों के बीच समानता व बराबरी स्थापित करना, समाज को बचाना और उसे पवित्र करना, और इस लक्ष्य में कठोरता और कोमलता के बीच का रास्ता चलना और दूरदर्शिता, अन्तर्दृष्टि और दया से काम लेना, और अल्लाह की पवित्र किताब के अनुसार अ़मल करना।

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