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रमज़ान की विशेषता

रमज़ान की विशेषता

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प्रस्तुत व्याख्यान में रमज़ान के महीने की फज़ीलत-प्रतिष्ठा और उसकी विशेषताओं पर चर्चा करते हुए, यह उल्लेख किया गया है कि रमज़ान खैर व बर्कत का महीना है, इसी महीने में सर्वमानव जाति के मार्गदशन के लिए क़ुरआन अवतरित हुआ, इसमे एक रात ऐसी है जिसका पुण्य एक हज़ार महीने की इबादत के बराबर है, और इसमें उम्रा करना हज्ज के बराबर है। तथा इस महीने की महान घड़ियों और क्षणों से भरपूर लाभ उठाने पर बल दिया गया है, और उसके रोज़ों के बारे में कोताही करने पर चेतावनी दी गई है और उसके दुष्परिणाम से अवज्ञत कराया गया है।

शबे-बरात की वास्तविकता

शबे-बरात की वास्तविकता

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शबे-बरात की वास्तविकता : वर्तमान समय में मुसलमानों के अंदर बिदनतों का बाहुल्य और भरमार है, जिनके दुष्ट परिणाम उनके जीवन में जगज़ाहिर हैं, जबकि परलोक में उन्हें कठोर अपमान, तिरस्कार और ह़ौज़े-कौसर से निराशा का सामना करना होगा। मुसलमानो में बिदअतों के प्रचलन के कुछ कारण हैं। इस आडियो में कुछ कारणों का उल्लेख करते हुए शाबान के महीने में प्रचलित एक निंदित बिदअत शबे-बरात की हक़ीक़त का खुलासा किया गया है।

दंपती के बीच विवाद - 1

दंपती के बीच विवाद - 1

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दंपती के बीच विवादः दंपती के बीच विवाद अपरिहार्य है, और शायद ही कोई घर है जो इससे खाली हो। लेकिन इस विवाद के कारणों और कारकों को समझकर इन मतभेदों का उचित समाधान खोजना, वैवाहिक किंगडम के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है। इस प्रवचन में, दंपती के बीच विवाद के कुछ कारणों और उनके शरई समाधान, तथा वैवाहिक विवाद से निपटने के लिए कुछ सुझावों का वर्णन किया गया है।

दंपती के बीच विवाद - 2

दंपती के बीच विवाद - 2

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दंपती के बीच विवादः दंपती के बीच विवाद अपरिहार्य है, और शायद ही कोई घर है जो इससे खाली हो। लेकिन इस विवाद के कारणों और कारकों को समझकर इन मतभेदों का उचित समाधान खोजना, वैवाहिक किंगडम के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है। इस प्रवचन में, दंपती के बीच विवाद के कुछ कारणों और उनके शरई समाधान, तथा वैवाहिक विवाद से निपटने के लिए कुछ सुझावों का वर्णन किया गया है।

हराम चीज़ें- जिन्हें हल्का समझ लिया गाय - 1

हराम चीज़ें- जिन्हें हल्का समझ लिया गाय - 1

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अल्लाह सर्वशक्तिमान ने मनुष्य की रचना कर उन्हें नाना प्रकार के अनुग्रहों से सम्मानित किया है और साथ ही साथ कुछ आदेश और निषेध निर्धारित किए हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। परंतु अज्ञानता के कारण लोगों के अंदर उनके विचार, वचन और कर्म में अनेक ऐसी चीज़ें है प्रचलित हैं जो अल्लाह सर्वशक्तिमान के निकट महा पाप और जघन्य अपराध की श्रेणी में आती हैं। जबकि लोगों का हाल यह है कि वे उन्हें तुच्छ और हल्का समझते हैं, या कुछ लोग उन्हें धर्म का काम समझकर बड़ी आस्था के साथ करते हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में उन्हीं हराम चीज़ों का खुलासा करते हुए, उनसे बचने का आह्वान किया गया है।

हराम चीज़ें- जिन्हें हल्का समझ लिया गाय - 2

हराम चीज़ें- जिन्हें हल्का समझ लिया गाय - 2

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अल्लाह सर्वशक्तिमान ने मनुष्य की रचना कर उन्हें नाना प्रकार के अनुग्रहों से सम्मानित किया है और साथ ही साथ कुछ आदेश और निषेध निर्धारित किए हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। परंतु अज्ञानता के कारण लोगों के अंदर उनके विचार, वचन और कर्म में अनेक ऐसी चीज़ें है प्रचलित हैं जो अल्लाह सर्वशक्तिमान के निकट महा पाप और जघन्य अपराध की श्रेणी में आती हैं। जबकि लोगों का हाल यह है कि वे उन्हें तुच्छ और हल्का समझते हैं, या कुछ लोग उन्हें धर्म का काम समझकर बड़ी आस्था के साथ करते हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में उन्हीं हराम चीज़ों का खुलासा करते हुए, उनसे बचने का आह्वान किया गया है।

मुहर्रम के महीने के प्रावधान-1

मुहर्रम के महीने के प्रावधान-1

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मुहर्रम के महीने के प्रावधानः इअल्लाह का महीना मुहर्रमुल-हराम एक महान और हुर्मत वाला महीना है, जिसे अल्लाह तआला ने आकाश एवं धरती की रचना करने के समय ही से हुर्मत –सम्मान एवं प्रतिष्ठा- वाला घोषित किया है, तथा यह हिज्री-वर्ष का प्रथम महीना है। प्रस्तुत व्याख्यान में इस महीने की विशेषता तथा इस में धर्मसंगत रोज़े का उल्लेख किया गया है।मुहर्रम के महीने के प्रावधानः इअल्लाह का महीना मुहर्रमुल-हराम एक महान और हुर्मत वाला महीना है, जिसे अल्लाह तआला ने आकाश एवं धरती की रचना करने के समय ही से हुर्मत –सम्मान एवं प्रतिष्ठा- वाला घोषित किया है, तथा यह हिज्री-वर्ष का प्रथम महीना है। प्रस्तुत व्याख्यान में इस महीने की विशेषता तथा इस में धर्मसंगत रोज़े का उल्लेख किया गया है। इसी तरह आशूरा के बारे में वर्णित कमज़ोर व मनगढ़त हदीसों पर चेतावनी दी गई है।

मुहर्रम के महीने के प्रावधान-2

मुहर्रम के महीने के प्रावधान-2

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मुहर्रम के महीने के प्रावधानः इअल्लाह का महीना मुहर्रमुल-हराम एक महान और हुर्मत वाला महीना है, जिसे अल्लाह तआला ने आकाश एवं धरती की रचना करने के समय ही से हुर्मत –सम्मान एवं प्रतिष्ठा- वाला घोषित किया है, तथा यह हिज्री-वर्ष का प्रथम महीना है। प्रस्तुत व्याख्यान में इस महीने की विशेषता तथा इस में धर्मसंगत रोज़े का उल्लेख किया गया है।मुहर्रम के महीने के प्रावधानः इअल्लाह का महीना मुहर्रमुल-हराम एक महान और हुर्मत वाला महीना है, जिसे अल्लाह तआला ने आकाश एवं धरती की रचना करने के समय ही से हुर्मत –सम्मान एवं प्रतिष्ठा- वाला घोषित किया है, तथा यह हिज्री-वर्ष का प्रथम महीना है। प्रस्तुत व्याख्यान में इस महीने की विशेषता तथा इस में धर्मसंगत रोज़े का उल्लेख किया गया है। इसी तरह आशूरा के बारे में वर्णित कमज़ोर व मनगढ़त हदीसों पर चेतावनी दी गई है।

सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम की महानता

सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम की महानता

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सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम की महानताः प्रस्तुत व्याख्यान में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सम्मानित सहाबा रज़ियल्लाह अन्हुम की महानता व प्रतिष्ठा का उल्लेख किया गया है। ये लोग इस उम्मत की पहली पीढ़ी हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपने पैगंबर की संगति और इस महान धर्म की रक्षा तथा उसके प्रसार-प्रचार के लिए चयन किया। सहाबा के बारे में शीया संप्रदाय की नीति व व्यवहार ग़लत मात्र है, पवित्र क़ुरआन के स्पष्ट प्रमण इसका खण्डन करते हैं।

हरमैन की महानता और मुसलमानों की ज़िम्मेदारी

हरमैन की महानता और मुसलमानों की ज़िम्मेदारी

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हरमैन की महानता और मुसलमानों की ज़िम्मेदारी : प्रस्तुत व्याख्यान में हरमैन शरीफैन की महानता का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि हरमैम शरीफैन की रक्षा और बचाव करना सभी मुसलमानों की जिम्मेदारी है। साथ ही साथ भारतीय उप-महाद्वीप के अह्ले-हदीस विद्वानों के किंग अब्दुल अजीज के साथ हरमैन के मुद्दों पर समर्थन और सहयोग के कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया गया है।

ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों की फज़ीलत

ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों की फज़ीलत

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ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों की फज़ीलत : प्रस्तुत आडियो में दुनिया के सर्वोत्तम दिह ज़ुलहिज्जा के पहले दस दिनों की फज़ीलत, और उनमें धर्मसंगत कार्यों का उल्लेख किया गया है। विशेषकर अरफा के दिन के रोज़े की फज़ीलत का वर्णन किया गया है जिससे अगलेऔर पिछले दो वर्ष के पाप माफ कर दिए जाते हैं।

हज्ज और उम्रा के फज़ायल

हज्ज और उम्रा के फज़ायल

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हज्ज और उम्रा के फज़ायल : प्रस्तुत व्याख्यान में हज्ज की अनिवार्यता, इस्लाम धर्म में उसके महत्व का उल्लेख करते हुए, दिव्य क़ुरआन और हदीस में हज्ज और उम्रा तथा उनके विभिन्न कार्यों के गुणविशेषण व प्रतिष्ठा का वर्णन किया गया है।

चाँद और नीयत के मसाइल

चाँद और नीयत के मसाइल

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प्रस्तुत आडियो में रमज़ान के महीने की महान घड़ियों और क्षणों से भरपूर लाभ उठाने पर बल देते हुए, रमज़ान के महीने की शुरूआत और उसके प्रवेष करने के सबूत का वर्णन किया गया है, और यह स्पष्ट किया गया कि रमज़ान के महीने के आरंभ होने की प्रामाणिकता रमज़ान का चाँद देखने या उसके देखे जाने पर एक विश्वस्त आदमी की गवाही का होना, और यदि किसी कारण चाँद न दिखाई दे तो शाबान के तीस दिन पूरे करना है। तथा रमज़ान से पहले उसके अभिवादन के तौर पर एक दो दिन रोज़ा रखना धर्मसंगत नही है। इसी तरह इसमें नीयत की अनिवार्यता, नीयत का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए यह उल्लेख किया गया है कि नीयत ज़ुबान से करना धर्मसंगत नही है।

रमज़ान की विशेषता

रमज़ान की विशेषता

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प्रस्तुत व्याख्यान में रमज़ान के महीने की फज़ीलत-प्रतिष्ठा और उसकी विशेषताओं पर चर्चा करते हुए, यह उल्लेख किया गया है कि रमज़ान खैर व बर्कत का महीना है, इसी महीने में सर्वमानव जाति के मार्गदशन के लिए क़ुरआन अवतरित हुआ, इसमे एक रात ऐसी है जिसका पुण्य एक हज़ार महीने की इबादत के बराबर है, और इसमें उम्रा करना हज्ज के बराबर है। तथा इस महीने की महान घड़ियों और क्षणों से भरपूर लाभ उठाने पर बल दिया गया है, और उसके रोज़ों के बारे में कोताही करने पर चेतावनी दी गई है और उसके दुष्परिणाम से अवज्ञत कराया गया है।

पंद्रह शाबान की हक़ीक़त

पंद्रह शाबान की हक़ीक़त

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वर्तमान समय में कुछ मुसलमानों के बीच प्रचलित बिदअतों में से एक घृणित बिदअत : पंद्रह शाबान की रात का जश्न मनाना है, जिसे अवाम में शबे-बराअत के नाम से जाना जाता है और उसमें अनेक प्रकार की शरीअत के विरुद्ध कार्य किए जाते हैं, जिनके लिए ज़ईफ़ और मनगढ़त हदीसों का सहारा लिया जाता है। इस आडियो में पंद्रह शाबान की रात के बारे में वर्णित हदीसों का चर्चा करते हुए, उनकी हक़ीक़त से पर्दा उठाया गया है।

ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों के कार्य

ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों के कार्य

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ज़ुल-हिज्जा के दस दिनों के कार्य : अल्लाह सर्वशक्तिमान की महान कृपा व अनुकम्पा और दानशीलता है कि उसने अपने दासों के लिए नेकियाँ कमाने और पुण्य प्राप्त करने अनेक रास्ते और अवसर प्रदान किए हैं। ज़ुल-हिज्जा के महीने प्राथमिक दस दिन नेकियों का महान अवसर और पर्व है। प्रस्तुत व्याख्यान में ज़ुल-हिज्जा के महीने के प्राथमिक दस दिनों की प्रतिष्ठा और उनके अन्दर वर्णित कार्यों, जैसे- हज्ज और उम्रा की अदायगी, रोज़े रखना - विशेषकर अरफा के दिन का रोज़ा जो दो साल के पापों का प्रायश्चित है-, क़ुर्बानी करना, अधिक से अधिक अल्लाहु अक्बर, ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्हम्दुलिल्लाह कहना तथा आज्ञारिता के अन्य कार्य करने, का उल्लेख किया गया है।

हज्ज का संक्षिप्त विवरण

हज्ज का संक्षिप्त विवरण

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हज्ज का संक्षिप्त विवरण : हज्ज एक महान वैश्विक अवसर है, जिसमें दुनिया के कोने-कोने से आकर मुसलमान अल्लाह के पवित्र घर मक्का मकर्रमा में एकत्रित होते हैं ; ताकि उस महान कर्तव्य को पूरा करें जो जीवन में केवल एक बार अनिवार्य है। प्रस्तुत व्याख्यान में हज्ज की अनिवार्यता, उसकी फज़ीलत, इस यात्रा के लिए हलाल धन की आपूर्ति, तथा इसे खालिस अल्लाह के लिए और उसके पैगंबर के बताए हुए तरीक़े के अनुसार अदा करने का उल्लेख है। इसी हज्ज के निर्धारित स्थानों (मीक़ात), एहराम बांधने के समय ऐच्छिक चीज़ों, एहराम की अवस्था में वर्जित और निषिद्ध चीज़ों और संक्षेप के साथ उम्रा और हज्ज की विधि का उल्लेख किया गया है।

रमज़ान के अंतिम दस दिनों की फज़ीलत

रमज़ान के अंतिम दस दिनों की फज़ीलत

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रमज़ान के अंतिम दस दिनों की फज़ीलतः इस उम्मत पर अल्लाह का बहुत बड़ा उपकार है कि उसने उन्हें रमज़ान के अंतिम दस दिनों में एक ऐसी रात प्रदान किया है, जो हज़ार महीनों (अर्थात 83 वर्षों) से अधिक बेहतर है। इसीलिए इस रात को पाने के लिए पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एतिकाफ़ करते थे और नेकी के कार्यों में बहुत संघर्ष करते थे, रातों को जागते थे और अपने परिवार को भप जगाते थे। प्रस्तुत व्याख्यान में इसी पर चर्चा किया गया है।

रोज़े की रक्षा

रोज़े की रक्षा

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रोज़े की रक्षाः रोज़ा मात्र खाना पानी छोड़ देने, या कुछ रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों से रुक जाने का नाम नहीं है। बल्कि वास्तविक रोज़ा गुनाहों से रुक जाने, उनसे दूर रहने का नाम है। प्रस्तुत व्याख्यान में, इस पवित्र महीने में गुनाहों में पड़ने से चेतावनी देते हुए, झूठ, हराम (निषिद्ध) चीज़ों को देखने, सुनने, बोलने और करने से रोज़े को सुरक्षित रखने पर ज़ोर दिया गया है। विशेषकर पाँच समय की दैनिक नमाज़ों मे कोताही व लापरवाही करने से सावधान किया गया है, जिसके बारे में शरीअत में कड़ी चेतावनी आई है। इसी तरह, रोज़े के अलावा रमज़ान के महीने में अन्य एच्छिक कार्यों जैसे- तरावीह की नमाज़, क़ियामुल्लैल और अधिक से अधिक क़ुरआन करीम का पाठ करने का उल्लेख किया गया है।

भारतीय

भारतीय

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मो० इन्तेखाबु्र रहमान अल सलफि हिंदी दाइ

इस्लाम ही मानवता के लिए समाधान है

इस्लाम ही मानवता के लिए समाधान है

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इस्लाम ही मानवता के लिए समाधान हैः अल्लाह सर्वशक्तिमान ने मानवजाति को एक महान उद्देश्य के लिए पैदा किया है, और उनके लिए उसकी ओर मार्गदर्शन का प्रबंध किया है। चुनाँचे उनकी ओर सन्देष्टा भेजे, उन पर अपनी पुस्तकें अवतरित कीं। यहाँ तक कि इस अनुकम्पा को परिपूर्ण कर दिया और इस ऋंखला को हमारे सन्देष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर संपन्न कर दिया। क्योंकि अल्लाह ने आपको अंतिम सन्देष्टा बनाकर रहती दुनिया तक सभी मानवजाति के लिए संदेशवाहक बनाया है। अतः मानवजाति के लिए जीवन में सौभाग्य, तथा परलोक में मोक्ष और सफलता केवल इस्लाम के मार्ग में है, और वही उनके सभी समस्याओं का समाधान है।प्रस्तुत व्याख्यान में, यह स्पष्ट किया गया है कि इस्लाम ही मानवता के लिए एकमात्र समाधान क्यों है।

हज्ज और उम्रा गाइड - 4

हज्ज और उम्रा गाइड - 4

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यह वीडियों हज्ज और उम्रा के लिए आने वाले अल्लाह के अतिथियों के लिये पर्याप्त मागदर्शन पर आधारित है। जिस में हज्ज के प्रकार, हज्ज या उम्रा का एहराम बांधने से पहले क्या करना चाहिए, एहराम बांधने का तरीक़ा, एहराम की हालत में निषिद्ध और वर्जित चीज़ें, उम्रा का तरीक़ा और उस की गततियों पर चेतावनी, हज्ज के कार्यों का विस्तृत वर्णन और उसके दौरान हाजियों से होने वाली गलतियों पर चेतावनी, तथा मिस्जदे नबवी की ज़ियारत के शरई तरीक़े का उल्लेख किया गया है।

हज्ज और उम्रा गाइड - 3

हज्ज और उम्रा गाइड - 3

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यह वीडियों हज्ज और उम्रा के लिए आने वाले अल्लाह के अतिथियों के लिये पर्याप्त मागदर्शन पर आधारित है। जिस में हज्ज के प्रकार, हज्ज या उम्रा का एहराम बांधने से पहले क्या करना चाहिए, एहराम बांधने का तरीक़ा, एहराम की हालत में निषिद्ध और वर्जित चीज़ें, उम्रा का तरीक़ा और उस की गततियों पर चेतावनी, हज्ज के कार्यों का विस्तृत वर्णन और उसके दौरान हाजियों से होने वाली गलतियों पर चेतावनी, तथा मिस्जदे नबवी की ज़ियारत के शरई तरीक़े का उल्लेख किया गया है।

ईमान बिल्लाह और तौहीद की हक़ीक़त

ईमान बिल्लाह और तौहीद की हक़ीक़त

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इस ऑडयिों में उन बातों का उल्लेख किया गया है जिन पर हमारे संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ईमान लाने का आदेश दिया है, और उनमें सर्व प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण अल्लाह पर ईमान लाना अर्थात ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ का इक़रार करना है। जिस पर इस्लाम की आधारशिला है, और जिसके द्वारा एक मुसलमान के बीच और एक काफिर, मुश्रिक और नास्तिक के बीच अंतर होता है। लेकिन केवल इस कलिमा का उच्चारण मात्र ही काफी नहीं है, बल्कि उसके अर्थ और भाव पर पूरा उतरना ज़रूरी है। इसी तरह ‘इलाह’ (पूज्य) का अर्थ और ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ की वास्तविकता का उल्लेख करते हुए, मानव जीवन में इस कलिमा के प्रभावों का उल्लेख किया गया है। अंत में उन अवशेष बातों का उल्लेख किया गया है जिन पर ईमान लाने का पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें आदेश दिया है, और वे : अल्लाह के फरिश्तों, उसकी पुस्तकों, उसके पैगंबरों, परलोक के दिन, और अच्छी व बुरी तक़्दीर (भाग्य) पर ईमान लाना, हैं।

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 1

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 1

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क़ुर्आन और हदीस से यह बात प्रमाणित है कि जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद - की एक अटल हक़ीक़त है जिसका इनकार संभव नहीं। तथा यह बात भी वस्तुस्थिति कि आजकल बहुत से लोग जादूगरों, बाबाओं, रूहानी इलाज करने के दावेदारों ... इत्यादि के मायाजाल में फंसे हुये हैं, और खेद की बात यह है कि ये झूठे, धोखेबाज़, छली, फरेबी, मक्कार और दज्जाल, सीधे-साधे मासूम लोगों की जेबैं खाली करने के साथ-साथ उनके दीन व ईमान को भी नष्ट और भ्रष्ट कर रहे हैं। इसलिए आवश्यकता है कि लोगों के सामने इन सारी चीज़ों की हक़ीक़त को उजागर करते हुये इन लुटेरों का असली चेहरा उघारा जाये। इस आडियो में जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, क़ुर्आन औऱ सहीह हदीस की रोशनी में उन से बचाव और उपचार के तरीक़े का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से जादू-मंत्र करने वालो की रहस्मय दुनिया का अच्छा खुलासा किया गया है। .

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 4

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 4

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क़ुर्आन और हदीस से यह बात प्रमाणित है कि जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद - की एक अटल हक़ीक़त है जिसका इनकार संभव नहीं। तथा यह बात भी वस्तुस्थिति कि आजकल बहुत से लोग जादूगरों, बाबाओं, रूहानी इलाज करने के दावेदारों ... इत्यादि के मायाजाल में फंसे हुये हैं, और खेद की बात यह है कि ये झूठे, धोखेबाज़, छली, फरेबी, मक्कार और दज्जाल, सीधे-साधे मासूम लोगों की जेबैं खाली करने के साथ-साथ उनके दीन व ईमान को भी नष्ट और भ्रष्ट कर रहे हैं। इसलिए आवश्यकता है कि लोगों के सामने इन सारी चीज़ों की हक़ीक़त को उजागर करते हुये इन लुटेरों का असली चेहरा उघारा जाये। इस आडियो में जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, क़ुर्आन औऱ सहीह हदीस की रोशनी में उन से बचाव और उपचार के तरीक़े का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से जादू-मंत्र करने वालो की रहस्मय दुनिया का अच्छा खुलासा किया गया है। .

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 1

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 1

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 2

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 2

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 3

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 3

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 4

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 4

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।