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इस सृष्टा के गुणों की पहचान उसके किए हुए कार्यों और बनाई हुई चीज़ों (रचनाओं) के अध्ययन और अनुवर्ती के माध्यम से होती है। उदाहरण के लिए, एक पुस्तक को ही ले लीजिए जो उसके लेखक के ज्ञान, उसके अनुभव, उसकी संस्कृति, उसकी शैली, उसकी सोच और उसके कार्य करने (उपलब्धि) और विश्लेषण करने की क्षमता का पता देती है। इसी तरह सारी बनाई हुई चीज़ें, निर्माता की विशेषताओं के बारे में एक व्यापक विचार और तस्वीर देती हैं। यदि लोग ब्रह्मांड और उसके अंदर उपस्थित प्राणियों और रचनाओं के साथ इसी वैज्ञानिक तर्क का उपयोग करें तो वे सृष्टा (निर्माता) की विशेषताओं की जानकारी तक पहुँच सकते हैं। समुद्र और प्रकृति की सुंदरता, कोशिकाओं की सटीकता और उनके विवरण की तत्वदर्शिता, ब्रह्मांड का संतुलन और उसकी आंदोलन प्रणाली, और वे सभी विज्ञान जहाँ तक मानव पहुँचा है, यह सब के सब सृष्टा की महानता, ज्ञान और बुद्धि का संकेत देते हैं।

चाहे लोग संसार को पैदा करने की हिकमत (तत्वदर्शिता) का पता चलाने में सहमत हों या वे इसका पता न लगा सकें, और चाहे वे जीवन में कठिनाइयों और दर्द के पाए जाने के पीछे कारण (तत्वदर्शिता) के विषय में सहमति बना सकें या सहमत न हों, परंतु यह उस परिणाम को कुछ भी नहीं बदल सकता जो वैज्ञानिक तर्क के द्वारा प्राप्त हुआ है, जो एक महान, सर्वज्ञानी और बुद्धिमान सृष्टा के अस्तित्व की पुष्टि करता है, जिसे विश्वासी  लोग (मुसलमान) सर्वसहमति के साथ “अल्लाह” सर्वशक्तिमान की संज्ञा देते हैं।

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