सामग्री (विषयवसतु)

स्तर की सामग्री(विषयवसतु)

अल्लाह ब्रह्मांड (विश्व) का निर्माता है।

अल्लाह ब्रह्मांड (विश्व) का निर्माता है।

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इस सृष्टा के गुणों की पहचान उसके किए हुए कार्यों और बनाई हुई चीज़ों (रचनाओं) के अध्ययन और अनुवर्ती के माध्यम से होती है। उदाहरण के लिए, एक पुस्तक को ही ले लीजिए जो उसके लेखक के ज्ञान, उसके अनुभव, उसकी संस्कृति, उसकी शैली, उसकी सोच और उसके कार्य करने (उपलब्धि) और विश्लेषण करने की क्षमता का पता देती है। इसी तरह सारी बनाई हुई चीज़ें, निर्माता की विशेषताओं के बारे में एक व्यापक विचार और तस्वीर देती हैं। यदि लोग ब्रह्मांड और उसके अंदर उपस्थित प्राणियों और रचनाओं के साथ इसी वैज्ञानिक तर्क का उपयोग करें तो वे सृष्टा (निर्माता) की विशेषताओं की जानकारी तक पहुँच सकते हैं। समुद्र और प्रकृति की सुंदरता, कोशिकाओं की सटीकता और उनके विवरण की तत्वदर्शिता, ब्रह्मांड का संतुलन और उसकी आंदोलन प्रणाली, और वे सभी विज्ञान जहाँ तक मानव पहुँचा है, यह सब के सब सृष्टा की महानता, ज्ञान और बुद्धि का संकेत देते हैं।

निर्माता का अस्तित्व (वजूद)

निर्माता का अस्तित्व (वजूद)

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पूरा ब्रह्माण्ड अपने सभी जीवित या निर्जीव, स्थिर और गतिशील चीज़ों  के साथ अनस्तित्व के बाद अस्तित्व में आया है। अतः तर्क और विज्ञान दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि कोई ऐसा अस्तित्व है जिसने ब्रह्मांड को बनाया है। चाहे उसका नाम अल्लाह हो या सृष्टा हो या सृजनहार हो या प्रारंभकर्ता (पहली बार पैदा करने वाला) हो। उसका इस वास्तविकता पर कोई प्रभाव नहीं है। क्योंकि पूरा ब्रह्मांड अपने अंदर विद्यमान चीजों के साथ सृष्टा के अस्तित्व पर पर्याप्त प्रमाण है।

अल्लाह का अस्तित्व और उसकी विशेषताएँ

अल्लाह का अस्तित्व और उसकी विशेषताएँ

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(विश्वासियों और नास्तिकों समेत) सभी लोगों के बीच इस बात पर सहमत होना संभव है कि अल्लाह के अस्तित्व और उसकी विशेषताओं की सच्चाई तक पहुंचने के लिए एक मात्र रास्ता शुद्ध वैज्ञानिक तर्क होना चाहिए। क्योंकि इस बात से हर कोई सहमत है कि हर काम का कोई न कोई करनेवाला होता है और हर चीज़ के लिए कोई न कोई कारण होता है। इस से कोई चीज़ बाहर नहीं है। चुनाँचे कोई भी चीज़ निस्सारता से या अनस्तित्व से नहीं आती है। और न ही कोई चीज़ बिना कारण के या कारण पैदा करनेवाले के होती है। इसके उदाहरण अनगिनत हैं, जिनसे कोई अनदेखी नहीं कर सकता। 

अल्लाह कौन है?

अल्लाह कौन है?

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महिमावान “अल्लाह” के नाम का शब्द अरबी मूल का है। इस्लाम से पहले अरबों ने इस नाम का प्रयोग किया है। अल्लाह सर्वशक्तिमान सर्वोच्च पूज्य है जिसका कोई साझी नहीं। जिस पर, इस्लाम से पूर्व अज्ञानता की अवधि में अरब लोग ईमान रखते थे, लेकिन उनमें से कुछ लोगों ने उसके साथ अन्य देवताओं की भी पूजा की जबकि कुछ दूसरे लोगों ने उसकी उपासना में मूर्तियों को भी साझी ठहराया।

जो व्यक्ति अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान और विश्वास रखता है, वह अपने पड़ोसी को कष्ट न पहुंचाए

जो व्यक्ति अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान और विश्वास रखता है, वह अपने पड़ोसी को कष्ट न पहुंचाए

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जो व्यक्ति अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान और विश्वास रखता है, वह अपने पड़ोसी को कष्ट न पहुंचाए

कमज़ोर मोमिन की तुलना में शक्ति शाली (ताक़तवर ) मोमिन अधिक अच्छा और अल्लाह को अधिक प्रिय है रहो

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कमज़ोर मोमिन की तुलना में शक्ति शाली (ताक़तवर ) मोमिन अधिक अच्छा और अल्लाह को अधिक प्रिय है रहो

(सत्यनिष्ठा और धार्मिकता पर) सुदृढ़ और जमे रहो भले ही आप सभी अच्छे कार्यों को नहीं कर सकते

(सत्यनिष्ठा और धार्मिकता पर) सुदृढ़ और जमे रहो भले ही आप सभी अच्छे कार्यों को नहीं कर सकते

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(सत्यनिष्ठा और धार्मिकता पर) सुदृढ़ और जमे रहो भले ही आप सभी अच्छे कार्यों को नहीं कर सकते

मेरे हिन्दू दोस्त को एक संदेश

मेरे हिन्दू दोस्त को एक संदेश

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हर हिन्दू के लिए दिल से एक संदेश, जिसकी आंखों पर पर्दा पड़ा है, और सच्चाई तक नहीं पहुंचना चाहता है। एक संदेश जो आपके लिए एक साफ-सुथरी प्रकृति (स्वभाव या फि़त्रत) लिए हुए है, और जिसमें आपके उन सवालों के जवाब हैं जो आप आपने आप से अपने बचपन से पूछते आये हैं लेकिन आपको उनका संतुष्ट जवाब नहीं मिला पाया... एक ऐसा संदेश जो आपको सहीह और तर्कसंगतता (यानी बुद्धिमत्ता) का रास्ता बताएगा और आपको उस सच्चे ईश्वर से मिला देगा जिसे आप बचपन से खोज रहे हैं। यह मेरे हिन्दू दोस्त के लिए एक संदेश है। दिल से सुनो..और दिमाग से फैसला करो।

इस्लाम के सिद्धान्त और उसके मूल आधार

इस्लाम के सिद्धान्त और उसके मूल आधार

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इस पुस्तक में इस्लाम और उसके स्तंभों को परिभाषित करते हुए तथा कुछ अन्य मुद्दों का उल्लेख करते हुए, संक्षेप में इस्लाम का परिचय प्रस्तुत किया गया है। चुनाँचे सबसे पहले संक्षेप में ब्रह्माण्ड की रचना, उसकी रचना की तत्वदर्शिता, मनुष्य की रचना और उसका सम्मान, महिला का स्थान, मनुष्य की पैदाइश की हिक्मत, मनुष्य को धर्म की आवश्यकता, सच्चे धर्म का मापदंड, धर्मों के प्रकार, वर्तमान धर्मों की स्थिति, नबूवत (ईश्दूतत्व) की वास्तविकता, नबूवत की निशानियाँ, मानव जाति को संदेष्टाओं की ज़रूरत, आख़िरत, रसूलों की दावत के नियम एवं सिद्धांत, अनन्त सन्देश, खत्मे नबूवत का वर्णन किया है। फिर इस्लाम और उसके स्तंभो को परिभाषित करते हुए, धर्म की श्रेणियों और इस्लाम धर्म की कुछ अच्छाईयों का उल्लेख किया गया है।

लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम

लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम

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इस किताब में है : • कुरआन और हदीस की रोशनी में चंद हराम चीज़ों का बयान जिन्हें करते हुए बहुत सारे लोग गुरेज़ नहीं करते हैं , जैसेः अल्लाह के शिर्क करना , कब्रों की इबादत करना , सूद , रिश्वत और ज़िना वगैरा ।

ईमान के मूल आधार

ईमान के मूल आधार

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इस किताब में है : • इस्लाम धर्म हर युग , हर स्थान तथा हर सामुदाय के लिए उपयोगी है • कुरआन और हदीस की रोशनी में इस्लाम और ईमान के अरकान • इस्लामी अक़ीदा के मक़ासिद ( लक्ष्य - उद्देश ) ।

इस्लामी अकीदा की चंद झलकीयाँ

इस्लामी अकीदा की चंद झलकीयाँ

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इस किताब में है : • बंदों पर अल्लाह का हक़ • प्यारा दीन इस्लाम है • इस्लाम की तफ़सीर का मसदर • कुफ और ईमान • अल्लाह के असमा व सिफ़ात • अक्ल और वय • शरीअत साज़ी • तकदीर • हाकिम की इताअत • जिहाद • हुर्रियत का मतलब ।

नमाज़ नबी की का तरीका

नमाज़ नबी की का तरीका

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इस किताब में है : • तक्बीर से सलाम तक नमाज़ का तरीका • नमाज़ के अरकान , उसके वाजिबात और उसकी सुन्नतें • मर्दो पर जमाअत के नमाज़ पढ़ना वाजिब है • गाने बजाने , तस्वीर कशी , दाढ़ी मुंडाने , टख्नों के नीचे कपड़ा लटकाने और बीड़ी - सिगरेट पीने का विधान ।

अनमोल पैग़ाम हाजीयों के नाम

अनमोल पैग़ाम हाजीयों के नाम

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इस किताब में है : • वह जगहें जिनकी इबादत के तौर पर ज़ियारत करना अस्लन मशरूञ् ( मूलतः शरीअत सम्मत ) ही नहीं है • वह जगहें जिनकी इबादत के तौर पर जियारत करना उमुमन मशरूभू ( साधारणतः शरीअत सम्मत ) है . सबआ मसाजिद ( सात मस्जिदों ) की हकीकृत ।

हज्ज , उम्रह व मस्जिदे नबवी की ज़ियारत संबंधी गाइड

हज्ज , उम्रह व मस्जिदे नबवी की ज़ियारत संबंधी गाइड

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इस किताब में है : • इस्लाम से ख़ारिज करने वाली बातें • उम्रह का तरीका • हज्ज का विवरण • मस्जिदे नबवी की ज़ियारत • ग़लतियाँ जिनका इर्तिकाब बाज़ हाजी करते हैं • दुआएं ।