सामग्री (विषयवसतु)

स्तर की सामग्री(विषयवसतु)

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 4

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 4

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 3

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 3

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 2

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 2

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 1

हराम कमाई और उस पर चेतावनी 1

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धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 4

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 4

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क़ुर्आन और हदीस से यह बात प्रमाणित है कि जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद - की एक अटल हक़ीक़त है जिसका इनकार संभव नहीं। तथा यह बात भी वस्तुस्थिति कि आजकल बहुत से लोग जादूगरों, बाबाओं, रूहानी इलाज करने के दावेदारों ... इत्यादि के मायाजाल में फंसे हुये हैं, और खेद की बात यह है कि ये झूठे, धोखेबाज़, छली, फरेबी, मक्कार और दज्जाल, सीधे-साधे मासूम लोगों की जेबैं खाली करने के साथ-साथ उनके दीन व ईमान को भी नष्ट और भ्रष्ट कर रहे हैं। इसलिए आवश्यकता है कि लोगों के सामने इन सारी चीज़ों की हक़ीक़त को उजागर करते हुये इन लुटेरों का असली चेहरा उघारा जाये। इस आडियो में जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, क़ुर्आन औऱ सहीह हदीस की रोशनी में उन से बचाव और उपचार के तरीक़े का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से जादू-मंत्र करने वालो की रहस्मय दुनिया का अच्छा खुलासा किया गया है। .

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 1

जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, बचाव और उपचार 1

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क़ुर्आन और हदीस से यह बात प्रमाणित है कि जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद - की एक अटल हक़ीक़त है जिसका इनकार संभव नहीं। तथा यह बात भी वस्तुस्थिति कि आजकल बहुत से लोग जादूगरों, बाबाओं, रूहानी इलाज करने के दावेदारों ... इत्यादि के मायाजाल में फंसे हुये हैं, और खेद की बात यह है कि ये झूठे, धोखेबाज़, छली, फरेबी, मक्कार और दज्जाल, सीधे-साधे मासूम लोगों की जेबैं खाली करने के साथ-साथ उनके दीन व ईमान को भी नष्ट और भ्रष्ट कर रहे हैं। इसलिए आवश्यकता है कि लोगों के सामने इन सारी चीज़ों की हक़ीक़त को उजागर करते हुये इन लुटेरों का असली चेहरा उघारा जाये। इस आडियो में जिन्न, जादू, आसेब और नज़्रे-बद की हक़ीक़त, क़ुर्आन औऱ सहीह हदीस की रोशनी में उन से बचाव और उपचार के तरीक़े का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से जादू-मंत्र करने वालो की रहस्मय दुनिया का अच्छा खुलासा किया गया है। .

ईमान बिल्लाह और तौहीद की हक़ीक़त

ईमान बिल्लाह और तौहीद की हक़ीक़त

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इस ऑडयिों में उन बातों का उल्लेख किया गया है जिन पर हमारे संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ईमान लाने का आदेश दिया है, और उनमें सर्व प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण अल्लाह पर ईमान लाना अर्थात ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ का इक़रार करना है। जिस पर इस्लाम की आधारशिला है, और जिसके द्वारा एक मुसलमान के बीच और एक काफिर, मुश्रिक और नास्तिक के बीच अंतर होता है। लेकिन केवल इस कलिमा का उच्चारण मात्र ही काफी नहीं है, बल्कि उसके अर्थ और भाव पर पूरा उतरना ज़रूरी है। इसी तरह ‘इलाह’ (पूज्य) का अर्थ और ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ की वास्तविकता का उल्लेख करते हुए, मानव जीवन में इस कलिमा के प्रभावों का उल्लेख किया गया है। अंत में उन अवशेष बातों का उल्लेख किया गया है जिन पर ईमान लाने का पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें आदेश दिया है, और वे : अल्लाह के फरिश्तों, उसकी पुस्तकों, उसके पैगंबरों, परलोक के दिन, और अच्छी व बुरी तक़्दीर (भाग्य) पर ईमान लाना, हैं।

(25) पच्चीसवीं वसियत: शुक्रवार (जुमा) को सम्भोग करने (यानी पत्नी के साथ शरीरिक संबंध बनाने) की फज़ीलत (विशेषता)

(25) पच्चीसवीं वसियत: शुक्रवार (जुमा) को सम्भोग करने (यानी पत्नी के साथ शरीरिक संबंध बनाने) की फज़ीलत (विशेषता)

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पच्चीसवीं वसियत: शुक्रवार (जुमा) को सम्भोग करने (यानी पत्नी के साथ शरीरिक संबंध बनाने) की फज़ीलत (विशेषता) 

(23) तेईसवीं वसियत: जो सम्भोग (पत्नी के साथ सेक्स) करने के बाद जुनुबी (ऐसा नापाक व अपवित्र व्यक्ति जिस के लिए गुस्ल करना (यानी नहाना) अनिवार्य व फ़र्ज़ है।और इस पाठ में सभी जगह नापाक का अर्थ

(23) तेईसवीं वसियत: जो सम्भोग (पत्नी के साथ सेक्स) करने के बाद जुनुबी (ऐसा नापाक व अपवित्र व्यक्ति जिस के लिए गुस्ल करना (यानी नहाना) अनिवार्य व फ़र्ज़ है।और इस पाठ में सभी जगह नापाक का अर्थ

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 तेईसवीं वसियत: जो सम्भोग (पत्नी के साथ सेक्स) करने के बाद जुनुबी (ऐसा नापाक व अपवित्र व्यक्ति जिस के लिए गुस्ल करना (यानी नहाना) अनिवार्य व फ़र्ज़ है।और इस पाठ में सभी जगह नापाक का अर्थ यही है।) सोना चाहे तो वह वुज़ू करे।

(21) इक्कीसवीं वसियत: " सतर " (अर्थ: छुपाना यानी शरीर का वह विशेष भाग जिसका छुपाना पुरूष और स्त्री हर एक के लिये अनिवार्य व ज़रूरी होता है उसे अरबी भाषा में "औरह" और उर्दू में सतर कहा जाता ह

(21) इक्कीसवीं वसियत: " सतर " (अर्थ: छुपाना यानी शरीर का वह विशेष भाग जिसका छुपाना पुरूष और स्त्री हर एक के लिये अनिवार्य व ज़रूरी होता है उसे अरबी भाषा में "औरह" और उर्दू में सतर कहा जाता ह

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इक्कीसवीं वसियत: " सतर " (अर्थ:  छुपाना यानी शरीर का वह विशेष भाग जिसका छुपाना पुरूष और स्त्री हर एक के लिये अनिवार्य व ज़रूरी होता है उसे अरबी भाषा में "औरह" और उर्दू में सतर कहा जाता है)की सुरक्षा व हिफाज़त करने की वसियत।