सामग्री (विषयवसतु)

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(25) पच्चीसवीं वसियत: शुक्रवार (जुमा) को सम्भोग करने (यानी पत्नी के साथ शरीरिक संबंध बनाने) की फज़ीलत (विशेषता)

(25) पच्चीसवीं वसियत: शुक्रवार (जुमा) को सम्भोग करने (यानी पत्नी के साथ शरीरिक संबंध बनाने) की फज़ीलत (विशेषता)

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पच्चीसवीं वसियत: शुक्रवार (जुमा) को सम्भोग करने (यानी पत्नी के साथ शरीरिक संबंध बनाने) की फज़ीलत (विशेषता) 

(23) तेईसवीं वसियत: जो सम्भोग (पत्नी के साथ सेक्स) करने के बाद जुनुबी (ऐसा नापाक व अपवित्र व्यक्ति जिस के लिए गुस्ल करना (यानी नहाना) अनिवार्य व फ़र्ज़ है।और इस पाठ में सभी जगह नापाक का अर्थ

(23) तेईसवीं वसियत: जो सम्भोग (पत्नी के साथ सेक्स) करने के बाद जुनुबी (ऐसा नापाक व अपवित्र व्यक्ति जिस के लिए गुस्ल करना (यानी नहाना) अनिवार्य व फ़र्ज़ है।और इस पाठ में सभी जगह नापाक का अर्थ

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 तेईसवीं वसियत: जो सम्भोग (पत्नी के साथ सेक्स) करने के बाद जुनुबी (ऐसा नापाक व अपवित्र व्यक्ति जिस के लिए गुस्ल करना (यानी नहाना) अनिवार्य व फ़र्ज़ है।और इस पाठ में सभी जगह नापाक का अर्थ यही है।) सोना चाहे तो वह वुज़ू करे।

(21) इक्कीसवीं वसियत: " सतर " (अर्थ: छुपाना यानी शरीर का वह विशेष भाग जिसका छुपाना पुरूष और स्त्री हर एक के लिये अनिवार्य व ज़रूरी होता है उसे अरबी भाषा में "औरह" और उर्दू में सतर कहा जाता ह

(21) इक्कीसवीं वसियत: " सतर " (अर्थ: छुपाना यानी शरीर का वह विशेष भाग जिसका छुपाना पुरूष और स्त्री हर एक के लिये अनिवार्य व ज़रूरी होता है उसे अरबी भाषा में "औरह" और उर्दू में सतर कहा जाता ह

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इक्कीसवीं वसियत: " सतर " (अर्थ:  छुपाना यानी शरीर का वह विशेष भाग जिसका छुपाना पुरूष और स्त्री हर एक के लिये अनिवार्य व ज़रूरी होता है उसे अरबी भाषा में "औरह" और उर्दू में सतर कहा जाता है)की सुरक्षा व हिफाज़त करने की वसियत।