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विवाह के दिन दूल्‍हा-दुल्‍हन के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की वसियतों में से एक वसियत विवाह यह है कि वे विवाह में आई हुई महिलाओं और आए हुए (पुरुषों और ) बच्चों का धन्यवाद करें, ह़ज़रत अनस बिन मालिक - अल्लाह उनसे प्रसन्न हो - से उल्लेख है वह कहते हैं :

 " अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम को कुछ महिलाएं और बच्चे एक विवाह से आते दिखाई दिए, तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम खुशी से तेज़ी के साथ खड़े हुए और बोले : अल्लाह (गवाह है)  तुम लोग मुझे सबसे ज़्यादा व अधिक प्यारे हो। "

इस ह़दीस़ शरीफ में शब्द" फा़ क़ामा मुमतन्नन" आया है, यह शब्द"मुन्नह" से लिया गया है, इसका अर्थ है कि उनसे प्रसन्न होकर खूब तेज़ी से खड़े हुए।

 अबु मरवान बिन अल सिराज ने कहा है कि क़ुरत़ुबी ने इसे अधिक उचित बताया है कि यह शब्द "इमतिनान " (एहसान करना) से लिया गया है, क्योंकि जिसके लिए नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम खड़े होंऔर उसे इस तरह से सम्मानित करें, तो यह उस पर ऐसा एहसान है कि उससे बढ़कर कोई भी नहीं।

और वह कहते हैं कि इस माना की सहायता उस वाक्य से भी होती है जो इसके बाद है और वह यह है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फरमाया : " तुम लोग मुझे सबसे ज़्यादा व अधिक प्यारे हो। "

और विद्वान क़ाबिस कहते हैं : उनके शब्द "मुमतन्नन" का मतलब है कि उन पर इसके द्वारा एहसान करते हुए, तो गोया कि उन्होंने यह कहा कि नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम अपने प्यार के द्वारा उन पर एहसान करते हैं, और एक दुसरी रिवायत में शब्द " मतीनन "आया है, जिसका मतलब है कि नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम सीधे तौर पर खड़े हुए।

ह़दीस़ शरीफ में शब्द " अल्लाहुम्मा " आया है, इस शब्द का प्रयोग बरकत या अपने सत्य पर अल्लाह को गवाह बनाने के लिए होता है।

अत: दूल्हा को चाहिए कि उसके विवाह में आने वाले पुरुषों और बच्चों का वह धन्यवाद करे, और दुल्हन को भी चाहिए कि वह उसके विवाह में आने वाली महिलाओं और बच्चियों को धन्यवाद कहे।

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([1]) यह ह़दीस़ सही़ह़, बुख़ारी (5180), मुस्लिम(1948) अह़मद (3/176)

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