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मज़लूम की बद्दुआ़ से बचे रहना।

मज़लूम की बद्दुआ़ से बचे रहना।

ह़ज़रत अ़ब्दुल्लह बिन अब्बास रद़ियल्लाहु अ़न्हु से उल्लेख है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने ह़ज़रत मुआ़ज़ बिन जबल रद़ियल्लाहु अ़न्हु को यमन भेजा तो उनसे कहा: " मज़लूम की बद्दुआ़ से बचे रहना। क्योंकि उसके और अल्लाह के बीच कोई रुकावट नहीं है।"

ए लोगों! मरने से पहले अल्लाह की बारगाह में तौबा कर लो।

ए लोगों! मरने से पहले अल्लाह की बारगाह में तौबा कर लो।

ह़ज़रत जाबिर बिन अ़ब्दुल्लाह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने हमें भाषण देते हुए फ़रमाया: "ए लोगों! मरने से पहले अल्लाह की बारगाह में तौबा कर लो। और दूसरे कामों में व्यस्त कर दिए जाने से पहले जल्दी जल्दी नेक काम कर लो। और अल्लाह का बहुत ज़्यादा ज़िक्र करके और जाहिरी (खुले) और खुफिया (गुप्त) तौर पर सदका़ करके उसके और अपने बीच रिश्ता मज़बूत कर लो। तब तुम्हें रिज़्क़ भी दिया जाएगा और तुम्हारी मदद भी की जाएगी।

जल्द ही तुम मेरे बाद स्वार्थपरता (खु़दग़र्ज़ी) देखोगे।

जल्द ही तुम मेरे बाद स्वार्थपरता (खु़दग़र्ज़ी) देखोगे।

ह़ज़रत अ़ब्दुल्लह बिन मसऊ़द कहते हैं कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने हम लोगों से इरशाद फ़रमाया: "जल्द ही तुम मेरे बाद स्वार्थपरता (खु़दग़र्ज़ी) और ऐसे काम देखोगे जिन्हें तुम बुरा जानोगे।" लोगों ने कहाः "ए अल्लाह के रसूल ऐसे समय में आप हमें क्या करने का हुक्म देते हैं?" आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:" तुम (उस समय के) उन (ह़ाकिमों) का अधिकार देना (यानि उनकी आज्ञा का पालन करना) और अपना अधिकार अल्लाह से मांगना।

नेक कामों में जल्दी करो इससे पहले कि वे फितने जाहिर हो जाएं जो तारीक रात के टुकड़ों की तरह होंगे।

नेक कामों में जल्दी करो इससे पहले कि वे फितने जाहिर हो जाएं जो तारीक रात के टुकड़ों की तरह होंगे।

ह़ज़रत अबू हुरैरह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: " नेक कामों में जल्दी करो इससे पहले कि वे फितने जाहिर हो जाएं जो तारीक रात के टुकड़ों की तरह होंगे और उन फितनों का असर यह होगा कि आदमी सुबह को ईमान की हालत में उठेगा और शाम को काफिर बन जाएगा और शाम को मोमिन होगा तो सुबह को काफिर। तथा अपने धर्म को दुनिया की थोड़ी सी चीज़ के बदले बेच डालेगा।

सात (आफतों के आने से पहले) जल्दी-जल्दी नेक काम कर लो।

सात (आफतों के आने से पहले) जल्दी-जल्दी नेक काम कर लो।

ह़ज़रत अबू हुरैरह रद़ियल्लाहु अ़न्हु कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:"सात (आफतों के आने से पहले) जल्दी-जल्दी नेक काम कर लो। क्या तुम्हें  (अल्लाह से) गाफिल कर देने वाली गरीबी, या ऐसी मालदारी जो तुम्हें भ्रष्ट बना दे, या हलाक कर देने वाली बीमारी या ऐसे ही बुढ़ापे जिससे अगले सठिया जाए या अचानक आने वाली मौत का इंतजार है या फिर दज्जाल जैसी बुरी गायब चीज़ का इंतजार है या फिर क़यामत का? बेशक कयामत तो बहुत हैबत नाक और कड़वी है।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने हमें सात चीज़ों के करने का हुक्म दिया और साथ चीज़ों से मना किया।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने हमें सात चीज़ों के करने का हुक्म दिया और साथ चीज़ों से मना किया।

ह़ज़रत बर्राअ बिन आ़ज़िब रद़ियल्लाहु अ़न्हु कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने हमें सात चीज़ों के करने का हुक्म दिया और साथ चीज़ों से मना किया: बीमार की खैरियत लेने, जनाजे़ में शरीक होने, छींक का जवाब देने, दावत करने वाले की दावत कुबूल करने, सलाम को खूब फैलाने, मज़लूम की मदद करने और क़सम पूरी करने का हमें हुक्म दिया। और सोने की अंगूठी पहनने, चांदी के बर्तन में (खाने) पीने, उर्गवानी (लाल) गद्दों (या क़ालीनों) के इस्तेमाल करने से (जबकि वे रेशम के हों), मिस्र के इलाके क़स के बने हुए कपड़ों से (जो रेशम के होते थे), किसी भी प्रकार के रेशम, इस्तबरक़ (रेशम के मोटे कपड़े) से और दीवाज (रेशम के बारीक कपड़े) के पहनने से मना किया।"

मुझे इतना ना बढ़ाओ जितना कि ईसाइयों ने ईसा बिन मरयम को बढ़ा दिया।

मुझे इतना ना बढ़ाओ जितना कि ईसाइयों ने ईसा बिन मरयम को बढ़ा दिया।

ह़ज़रत उ़मर बिन खत़्त़ाब कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:"मुझे इतना ना बढ़ाओ जितना कि ईसाइयों ने ईसा बिन मरयम (की तारीफ में ज़्यादती करके उन्हें अल्लाह का बेटा बना कर उन) को बढ़ा दिया। मैं अल्लाह का बंदा हि हूँ। तो तुम भी (मुझे) अल्लाह का बंदा और उसका रसूल (ही) कहो।

बेशक यह धर्म बहुत मज़बूत है।

बेशक यह धर्म बहुत मज़बूत है।

ह़ज़रत अनस कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "बेशक यह धर्म बहुत मज़बूत है लिहाज़ा इसमें नरमी से दाखिल हो। क्योंकि जो यात्री अपनी सवारी को आराम नहीं करने देता है तो ना ही वह अपनी मंज़िल तक पहुंचता है और ना ही उसकी सवारी (ऊंट) आगे चलने के क़ाबिल रहती है। (और फिर वह बीच रास्ते में ही हंसकर रह जाता है।)

बेशक धर्म आसान है।

बेशक धर्म आसान है।

ह़ज़रत अबू हुरैरा रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: “बेशक (इस्लाम) धर्म आसान है और जो धर्म में सख्ती करेगा तो धर्म उस पर हावी हो जाएगा। (और उसकी सख्ती ना चल सकेगी।) लिहाज़ा अपने कामों को) पुख्ता तौर पर करो और जहाँ तक हो सके संतुलन (मध्यमवर्ग) से काम लो और खुश रहो। और सुबह व शाम और रात की तारीकी में (इबादत से) मदद हासिल करो।" (पांचों वक्तों की नमाज़ें भी मुराद हो सकती हैं कि पाबंदी से अदा करो।)

जो काम करो ठीक तरह से करो और हद से ना से ना ना बड़ जाओ बल्कि उसके करीब रहो। (यानी मध्यमार्ग और संतुलन से काम करो)

जो काम करो ठीक तरह से करो और हद से ना से ना ना बड़ जाओ बल्कि उसके करीब रहो। (यानी मध्यमार्ग और संतुलन से काम करो)

ह़ज़रत आ़एशा कहती थीं कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फ़रमाया: " जो काम करो ठीक तरह से करो और हद से ना बड़ जाओ। (यानी मध्यमार्ग और संतुलन से काम करो) और खुश रहो। और याद रखो कि कोई भी अपने अमल की वजह से जन्नत में नहीं जाएगा।" सह़ाबा ने कहाः " और आप भी नहीं? ए अल्लाह के रसूल!" आपने फ़रमाया: "और मैं भी नहीं मगर यह कि अल्लाह अपनी मग़फिरत और रह़मत के साए में मुझे ढांप ले। और जान लो कि मेरे नज़दीक सबसे पसंदीदा काम वह है जो हमेशा किया जाए भले ही कम क्यों न हो।" 

ए बनू सलमह! अपने उन्हीं घरों में रहो। तुम्हारे कदमों के निशान लिखे जाते हैं।

ए बनू सलमह! अपने उन्हीं घरों में रहो। तुम्हारे कदमों के निशान लिखे जाते हैं।

ह़ज़रत जाबिर बिन अ़ब्दुल्लाह रद़ियल्लाहु अ़न्हु कहते हैं कि मस्जिद के आसपास कुछ जगहें खाली हुईं तो (क़बीला) बनू सलमह ने इरादा किया कि वे मस्जिद के पास आ जाएं। यह बात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम तक पहुंची तो आप ने उनसे इरशाद फ़रमाया: " मुझे यह खबर पहुंची है कि तुम मस्जिद के क़रीब आना चाहते हो।" उन्होंने कहा: "जी हाँ, ए अल्लाह के रसूल! हम हक़ीक़त में यह इरादा कर चुके हैं।" तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: " ए बनू सलमह! अपने उन्हीं घरों में रहो। तुम्हारे कदमों के निशान लिखे जाते हैं। अपने उन्हीं घरों में रहो। तुम्हारे कदमों के निशान लिखे जाते हैं।"