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सुहागरात को दूल्‍हा-दुल्‍हन के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की वसियतों में से एक वसियत पति का पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करना भी  है, क्योंकि पति का पत्नी के साथ व्यवहार पहली रात से ज़ाहिर हो जाता है, तो अगर पहली रात में पति का पत्नी के साथ व्यवहार अच्छा रहा और उसने उसके साथ दयालुता और कोमलता से काम लिया तो यह पहली रात इस बात का मार्ग व आदर्श होगी कि उनका आने वाला जीवन कैसा होगा।

अल्लाह पाक फ़रमाता है :

(अर्थ: उनके (यानी पत्नियों) के साथ अच्छा व्यवहार करो, फिर अगर वे तुम्हें पंसद न आएं, तो हो सकता है कि कोई चीज़ तुम्हें पंसद न हो और अल्लाह ने (तुम्हारे लिए) उसमें बहुत भलाई व अच्छाई रखी हो।)

इसीलिए सुहागरात में अल्लाह से पत्नी और अपने  लिए दुआ़ करके और पत्नी के प्रति प्रेम व प्यार दिखाते हुए अपने विवाहित जीवन को शुरू करें, क्योंकि आप अपनी पत्नी के निगरानी करने वाले और ज़िम्मेदार हैं जैसा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की वसियत में है : " तुम में से हर एक व्यक्ति ज़िम्मेदार (व निगरानी करने वाला) है और उससे उसकी ज़िम्मेदारी के बारे में पूछा जायेगा, शासक (बादशाह) अपनी प्रजा का ज़िम्मेदार है और उससे उसकी प्रजा व ज़िम्मेदारी के बारे में पूछा जायेगा, पुरुष अपने परिवार का ज़िम्मेदार व निगरानी करने वाला है, और उसकी ज़िम्मेदारी व निगरानी के बारे में पूछा जायेगा,  महिला अपने पति के घर की ज़िम्मेदार व निगरानी करने वाली है, और उससे उसकी ज़िम्मेदारी व निगरानी के बारे में पूछा जायेगा, नोकर अपने सरदार के माल का ज़िम्मेदार व निगरानी करने वाला है और उससे उसक  ज़िम्मेदारी व निगरानी के बारे में पूछा जायेगा, और पुरुष (बेटा) अपने पिता के माल का ज़िम्मेदार व निगरानी करने वाला है, उससे उसकी ज़िम्मेदारी व निगरानी के बारे में पूछा जायेगा, तो तुम में हर कोई ज़िम्मेदार व निगरानी करने वाला और हर एक से उसकी ज़िम्मेदारी व निगरानी के बारे में पूछा जायेगा।" ()

आदर्श और एक अच्छा पति अपनी पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करता है, अत: पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करने से घर और परिवार में अच्छा असर व प्रभाव पड़ता है, और घर व परिवार में अमन व शांति रहती है, और अच्छे व्यवहार से ही परिवार में एकता और आपसी समर्थन होता है जिससे कि एक मज़बूत घर बनता है। बच्चे एक अच्छे पारिवारिक माहौल में बड़े होते हैं, तो एक अच्छा और आदर्श पति अल्लाह की आज्ञा : " उनके (यानी पत्नियों) के साथ अच्छा व्यवहार करो, फिर अगर वे तुम्हें पंसद न आएं, तो हो सकता है कि कोई चीज़ तुम्हें पंसद न हो और अल्लाह ने (तुम्हारे लिए) उसमें बहुत भलाई व अच्छाई रखी हो।[3]) का पालन करते हुए अपनी पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करता है।

एक अच्छा और आदर्श पति अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की आज्ञा : “ महिलाओं के मामले में अल्लाह से डरो, क्योंकि तुमने उन्हें अल्लाह की अमान और अल्लाह के शब्द द्वारा प्राप्त किया है।“([4]) का पालन करते हुए अपनी पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करता है।

और अल्लाह का वह शब्द जिसके द्वारा विवाह की अनुमति व इजाज़त हुई और पुरुष और महिला के संबंध जायज़ हुए, वह यह है :

(तो विवाह करलो उन महिलाओं से जो तुम्हें पंसद आएं)

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([1]) सूरह : अल निसाअ, आयत:19         

([2])  यह ह़दीस़ सही़ह़ है, बुख़ारी (2/6) (3/196), मुस्लिम (1829) अह़मद (3/54)

([3])  सूरह: अल निसाअ, आयत:19

([4])  यह ह़दीस़ सही़ह़ है, बुख़ारी (1218), अह़मद (3/313), इब्ने ख़ुज़ैमह (2809), इब्ने हि़ब्बान (3/9(

([5]) सूरह: अल निसाअ, आयत: 3

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