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ह़ज़रत उ़मर बिन अबू सलमा कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की गोद में बैठा हुआ था और मेरा हाथ पूरी थाली में घूम रहा था तो मुझसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फ़रमाया: " ए लड़के! अल्लाह का नाम लो (यानी बिस्मिल्ला पढ़ो) और अपने दाहिने हाथ से खाओ और जो तुम्हारे सामने है उसमें से खाओ।" ह़ज़रत उ़मर बिन अबू सलमा रद़ियल्लाहु अ़न्हु कहते हैं कि तब से मैं इसी तरह खाता हूँ।

लोगों को संवारने, उनके अखलाक को अच्छा बनाने और खाने-पीने में उनके जाहिली ज़माने के आदाब और आदतों को खत्म करके उन्हें सुधारने के लिए इस्लाम जिन आदाब और अखलाक को लेकर आया है उन्हीं में से एक अदब का ज़िक्र इस ह़दीस़ पाक के अंदर आया है। अतः खाने-पीने, पहनने, उठने-बैठने, चलने -फिरने, सोने-जागने, आने-जाने, मेहमान नवाज़ी करने और इन जैसी लोगों की दूसरी आदतों में नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के बताए हुए आदाब और अखलाक को मज़बूती से अपनाए हुए थे।

ह़दीस़ में " अल्लाह का नाम लो " का मतलब है कि खाने के शुरू में बिस्मिल्लाह पढ़ लिया करो ताकि खाने में बरकत हो और वह लाभदायक और पूरा हो जाए।

"अपने दाहिने हाथ से खाओ" यह बहुत महत्वपूर्ण अदब है। क्योंकि हर अच्छा काम दाहने हाथ से करना चाहिए। क्योंकि दाहिना हाथ हर अच्छी चीज़ के करने के लिए बना है इसी वजह से इसे अरबी भाषा में "यमीन" कहते हैं जिसका मतलब है मुबारक और बरकत वाला।

"और जो तुम्हारे सामने हैं उसमें से खाओ। " यानी प्लेट या थाली में जो आपकी तरफ और आपके हाथ के नीचे हो उसी को खाओ और जो आपके साथ वाले की तरफ और उसके हाथ के नीचे हो उधर से मत खाओ क्योंकि यह अदब, शराफत और अच्छी आदत के खिलाफ है और इससे दूसरों को तकलीफ होती है।

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