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ह़ज़रत अबू हुरैरह रद़ियल्लाहु अ़न्हु कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फ़रमाया: " जब तुम में से किसी के बर्तन में मक्खी गिर जाए तो वह उसे पूरा डुबोले और फिर उसे निकाल कर फेंक दे। क्योंकि उसके एक पंख में इलाज है और दूसरे में बीमारी।"

बेशक यह ह़दीस़ पाक नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम का साइंसी मौजिज़ा (चमत्कार) है। क्योंकि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने तकरीबन साढ़े चौदह सौ साल पहले ही उस चीज़ के बारे में बता दिया जिसे आज साइंस दानों (विज्ञानियों) और डॉक्टरों ने तजुर्बों (अनुभवों) से साबित किया है जबकि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम (जा़हिरी तौर पर) न तो कोई विज्ञानी और डाक्टर थे और न ही कीड़ोँ के माहिर थे और न ही आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्ल का ज्ञान मुबारक अनुभवों और ख्याली कल्पनाओं पर आधारित नहीं था जैसा की आधारों (तर्कों) की सुरक्षा और परिणामों के सही करने के लिए वैज्ञानिक करते हैं। बल्कि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम एक रसूल व पैगम्बर थे जिन्हें अल्लाह ने इंसानों की हिदायत और रहनुमाई के लिए भेजा था, ज्ञान और हिकमत की दौलत से मालामाल किया था और दुनिया की अजीब व गरीब यानी चमत्कारी और उन चीज़ों के बारे में जानकारी दी थी जिनमें नुकसान और फायदे हैं ताकि इससे उनके मकसद को पुरा करने में मदद मिले।

मैं मक्खी के नुकसानों और फायदों के बारे में वैज्ञानिक संदर्भों को तलाश करने लगा जब कि इस ह़दीस़ पाक पर मेरा पूरा इमान था। आखिरकार मुझे जामिया अज़हर की मासिक पत्रिका (मैग्ज़ीन) में छपी हुई दलीलों से भरी हुई एक शौध मिला जिसे लाभदायक और हानिकारक किड़ो और चिकित्सा (डाक्टरी) के छेत्र में दो माहिर बड़े वैज्ञानिकों ने लिखा था। उस में बताया गया है कि:

1957 ई. में मोफ्टिस ने मक्खी के बदन पर पाये जाने वाले फंगस फॉर्म (fungus farm) से एंटीबायोटिक पदार्थों को अलग किया तो पता चला कि यह कुछ ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया जैसे टाइफाइड बैक्टीरिया में उन कीटाणुओं का विरोध करने के लिए बहुत ज़्यादा शक्तिशाली है जिनके कारण ऐसी घातक बीमारियाँ होती हैं जिनकी ऊष्ममायन अवधि बहुत कम होती  है। और उन्होंने यह भी पता लगाया कि इन जैव-विषाक्त पदार्थों का एक ग्राम हिस्सा एक हज़ार से अधिक लीटर दूध को उल्लेखित रोगजनक बैक्टीरिया के संदूषण से साफ कर सकता है। यह इन पदार्थों के असर की शक्ति और ताक़त की सबसे बड़ी दलील है।

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