ला ह़ौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह” जन्नत के ख़ज़ानो में से एक ख़ज़ाना है

ह़ज़रत अबू मूसा अशअ़री रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने खैबर पर आक्रमण किया या यह बयान किया कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम खैबर की तरफ चले तो (रास्ते में ) जब एक वादी में (एक ऊंची जगह) पर पहुंचे तो लोग बुलंद आवाज़ से अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर की तकबीरें कहने लगे। तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "अपनी जानों पर रह़म (दया) करो। तुम किसी बहरे या ऐसे को नहीं पुकार रहे हो जो गा़यब (अनुपस्थिति या दूर ) हो। तुम तो ऐसे को पुकार रहे हो जो सबसे ज़्यादा सुनने वाला है और तुम्हारे सबसे ज़्यादा नज़दीक है बल्कि वह हर समय तुम्हारे साथ है। (यानी अल्लाह तआ़ला। )" ह़ज़रत अबू मुसा अशअ़री कहते हैं:" और मैं अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की सवारी के पीछे था। तो आपने मुझे "ला ह़ौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह" कहते हुए सुन लिया। तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने मुझसे फ़रमाया: "ए अ़ब्दुल्लह बिन क़ैस!" मैंने कहा: लब्बैक या रसूल अल्लाह! (यानी मैं हाज़िर हूँ ए अल्लाह के रसूल!) आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "क्या मैं तुम्हें ऐसा शब्द न बतादूँ जो जन्नत के ख़ज़ानो में से एक ख़ज़ाना है?" मैंने कहा: "ज़रूर बताएं ए अल्लाह के रसूल! मेरे माता पिता आप पर क़ुर्बान हों!" तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "(वह शब्द यही है यानी) ला ह़ौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह (तर्जुमा: गुनाहों से बचने और नेकी करने की ताक़त और शक्ति केवल अल्लाह ही द्वारा है।) "

ह़ज़रत अबू मूसा अशअ़री रद़ियल्लाहु अ़न्हु के नबी करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से इस तरह कहने कि "ज़रूर बताएं ए अल्लाह के रसूल! मेरे माता-पिता आप पर कुर्बान हों!" से पता चलता है कि वह उस शब्द को जानने के लिए कितने बेचैन व उतावले और ख्वाहिश मंद थे। ताकि उसे जानें और अपने दिल और ज़ुबान से सुबह-शाम उसका ज़िक्र करें। और यह भी पता चलता है कि वह नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से कितनी मोहब्बत करते थे और उनके दिल में आप सल्लल्लाहु अ़लैहि का कितना सम्मान था।

अत: उनके पूछने पर नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "( कि वह शब्द यह है ) ला ह़ौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह (तर्जुमा: गुनाहों से बचने और नेकी करने की ताक़त और शक्ति केवल अल्लाह ही द्वारा है। ) और एक दूसरी रिवायत में है कि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:" कहो: "ला ह़ौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह" क्योंकि यह शब्द जन्नत के ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाना है।

इस शब्द का जन्नत के ख़ज़ानों में से एक ख़ज़ाना होने का मतलब यह है कि वह ख़ज़ाने की तरह है कि जिस तरह ख़ज़ाने में बहुत सारा माल होता है और इंसान उससे जो भी दुनिया की चीज़ खरीदना चाहे तो वह खरीद सकता है इसी तरह इस शब्द में भी बहुत सारा सवाब है जिससे इंसान जन्नत में बहुत से दर्जे और स्थान प्राप्त कर सकता है।

तथा जब हमें इस शब्द की महानता का पता चल गया तो अब हमारे लिए ज़रूरी है कि हम अधिकता से इसे पढ़ते रहें। क्योंकि यह एक ऐसा शब्द है जिसके जरिए मोमिन अपने तमाम कामों को अपने अल्लाह और अपने पैदा करने वाले पर सौंपने का मुकम्मल इज़हार करता है और जिससे उसे संतुष्टि और सुकून प्राप्त होता है।

यह एक ऐसा शब्द है जिसके ज़रिए अल्लाह मुसीबत और परेशानी में अपने बंदों को जमाए रखता है। खुशी और गमी दोनों में उनके हौसले मज़बूत करता है और दुनिया और आखिरत में इससे उनकी शान ऊंची करता है।

यह एक ऐसा कालिमा व शब्द है जिसके ज़रिए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मोमिनो के दिलों में इत्मिनान और सुकून की बारिशें करता है। और जितना वे अपनी जवानों से इस शब्द का पढ़ते हैं उतना ही उनका ईमान मज़बूत होता रहता है, उनके दिल ईमान की रोशनी से रोशन होते चले जाते हैं और उन पर इस शब्द के रहस्य और राज़ खुलते चले जाते हैं। लिहाज़ा यह एक ऐसा है जिससे अल्लाह के राज़ और उसकी ह़िकमतों के चश्मे खुलते हैं। क्योंकि कालिमए तौह़ीद (यानी ला इलाह इल्लल्लाह ) के बाद यह एक ऐसा कलिमा व शब्द है जो तमाम तरह के ज़िक्र को शामिल है और अपने अंदर समेटे हुए है।

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