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यह पुस्तक उस तौहीद (एकेश्वरवाद) की वास्तविकता को स्पष्ट करती है जिसके साथ अल्लाह ने समस्त संदेष्टा को अवतरित किया, तथा इस एकेश्वरवाद के विषय में अनेकेश्वरवादियों की ओर से व्यक्त किए जाने वाले संदेहों का खंडन करती है। लेखक ने इसमें तौहीद एवं शिर्क का अर्थ और उनके भेद, धरती पर घटित सर्वप्रथम शिर्क की घटना, तथा संसार में प्रचलित शिर्क के विभिन्न रूपों और इस समुदाय में शिर्क की बाहुल्यता एवं उसके पनपने के कारणों वर्णन किया है। उन्हीं में से एक व्यापक कारण वे संदेह हैं जिनका अनेकेश्वरवादी आश्रय लेते हैं और इस घोर पाप के लिए उन्हें अपना आधार मानते हैं। लेखक ने ऐसे 12 संदेहों का उल्लेख कर उनका स्पष्ट सत्तर दिया है। अंत में इस घोर पाप को करने वाले के भयंकर और दुष्ट परिणामों का चर्चा करते हुए इस से सावधान किया है।

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