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 हज़रत अबू हुरैरा (अल्लाह उन से प्रसन्न हो) से रिवायत है वह कहत हैं: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) ने फरमाया: "जो व्यक्ति अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान और विश्वास रखता है, वह अपने पड़ोसी को कष्ट न पहुंचाए, और जो व्यक्ति अल्लाह और आखिरत के दिन पर विश्वास रखता है तो उसे चाहिये कि अपने मेहमान का आदर-सम्मान करे, (और उसकी अच्छी तरीके से मेहमान नवाजी करे।) और जो व्यक्ति अल्लाह और आखिरत के दिन पर विश्वास और ईमान रखता है तो उसे चाहिये कि अच्छी बात करे या खामूश रहे।"

यह ह़दीस़ इमाम बुखारी और इमाम मुस्लिम ने हज़रत अबू हुरैरा (अल्लाह उन से प्रसन्न हो) से रिवायत की है, और उन दोनों ने यह ह़दीस़ ह़ज़रत शरीह़ अल अ़दवी से इस ज़्यादती के साथ रिवायत की है: तो उसे चाहिये कि वह अपने मेहमान का आदर-सम्मान करते हुए उसका पुरस्कार और उपहार दे, (और उसकी अच्छी तरीके से मेहमान नवाजी करे। ), लोगों ने पूछा: उसका उपहार कब तक है? नबी (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) ने फरमाया: "एक दिन और एक रात, और महमान नवाजी़ (अतिथि सत्कार) तीन दिन तक है, और जो उसके बाद हो वह उस पर दान है।"

नबी (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम)ने इस ह़दीस़ में अपने साथियों (अल्लाह उन से प्रसन्न हो) और उनके बाद आने वाले लोगों को तीन महान वसीयतें की हैं जो नैतिक सिद्धांतो की माताओं में हैं, क्योंकि इनमें वे महान विशेषताएं हैं जो ऐसे व्यक्ति के अन्दर होती हैं जिसका ईमान पूरा हो, जिसका विश्वास सच्चा हो और जिसका दिल कंजूसी और स्वार्थ और अन्य दूसरी गन्दी चीज़ों से साफ़ हो जो ईमान व विश्वास को मैला और उसकी रोशनी को खत्म कर देती हैं।

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