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आमिना ने आपके दादा को पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म का संदेश भिजवाया, तो उन्हों ने आकाश की ओर देखा और अल्लाह तआला के प्रति आभार प्रकट किया। फिर वह आपके पास आए, उन्हें अपनी गोद में उठाया और काबा की ओर गए। उन्हें लेकर काबा के अंदर गए, अल्लाह तआला का शुक्र अदा किया और नवजात शिशु के लिए अल्लाह तआला से बरकत की दुआ की। फिर उन्हें लेकर बाहर निकले ताकि उन्हें उनकी माँ के पास वापस कर दें।

जन्म के सातवें दिन अब्दुल मुत्तलिब ने उनका खत्ना किया, और उनके लिए भोज तैयार किया और लोगों को उस पर आमंत्रित किया, और आपका नाम मुहम्मद रखा।

जब काबा के पास क़ुरैश ने अब्दुल मुत्तलिब से पूछा कि : आप ने इसका नाम अपने गोत्र के नामों के समान क्यों नहीं रखा, इसका नाम मुहम्मद क्यों रखा ?

तो उन्हों ने उत्तर दिया : मैं चाहता हूँ कि अल्लाह इनकी आकाश में प्रशंसा करे और लोग धरती पर इनकी प्रशंसा करें।

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