पैगंबर (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) की

ह़ज़रत उम्मे दर्दाअ रद़ियल्लाहु अ़न्हा ह़ज़रत अबू दर्दाअ रद़ियल्लाहु अ़न्हु से रिवायत करती हैं कि उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: " बेशक अल्लाह ने बीमारी और इलाज दोनों उतारे हैं और हर बीमारी का इलाज है। लिहाज़ा इलाज करो। लेकिन ह़राम चीज़ से इलाज मत करो।"

क़ुरआन और सुन्नत के आदेश और निषेध (यानी वे चीज़ें जिन्हें करने का हुक्म दिया गया है और वे चिज़े जिनसे रुकने का हुक्म दिया है) हमारी हकीकत व वास्तविकता को सच्चे तौर पर व्यक्त व बयान करते हैं और हमारी ज़िंदगी की ज़रूरतों से पूरी तरह मेल खाते हैं और हमारी सांसारिक ख्वाहिशें के साथ-साथ आखिरत (परलोक) की ख्वाहिशों को भी एक आसान अंदाज़ में बहतर तरीक़े से पूरा करते हैं।

अत: क़ुरआन और सुन्नत बेहतरीन और स्पष्ट रहबर (मार्गदर्शक) और रोशन दलील हैं जिसने उनके अहकाम (नियम और क़ानून आदि) को सीख लिया वह इस बात को ज़रूर मान लेगा कि यह ऐसे नियम और कानून है कि जिनके आगे सभी क़ानून बनाने वाले दंग रह जाते हैं और इस तरह के अह़काम (का़नून और नियम) बनाने की उनकी अक्लें ताकत नहीं रखतीं हैं और केवल सांसारिक ज्ञान (दुनियावी इल्म) के माहिर बुद्धिमान उनकी हिकमतों और राज़ों को नहीं समझ सकते। क्योंकि उन्हें समझने के लिए केवल सांसारिक ज्ञान (दुनियावी इल्म) हि हासिल करना काफी नहीं है बल्कि दीनी इल्म का हासिल करना ज़रूरी है।

     बेशक इस्लाम अनपढ़ दिहातियों और उन जैसे लोगों  में मशहूर खुराफातों को एक अच्छे अंदाज में खत्म करता है और उन तमाम संदेहों और शकों का साफ़ और मज़बूत दालील द्वारा रद्द करता और उनका जवाब देता है जिन्हें शैतान अपने आज्ञाकारियों और मानने वालों के दिलों में डालकर बहकाता और गुमराह करता है अब चाहे उसके वे आज्ञाकारी खुले गुमराह और झूठे लोगों में से हों या फिर उन छुपे हुए मक्कारों और  गुमराहों में से हों जिन्हें लोग नेक और अच्छा समझते हैं।

अपनी भाषा चुनिए