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हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-से पूछा गया कि हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- जब अपने घर में प्रवेश करते थे तो किस चीज़ से शुरू करते थे तो उन्होंने कहा:मिस्वाक से l

यह हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-से कथित है, और यह हदीस सही है, यह हदीस इमाम मुस्लिम द्वारा उल्लेख की गई देखिए पेज या संख्या नमबर:253l

कुछ विद्वानों ने यहाँ एक बहुत बारीक वैज्ञानिक बात कही है l उनका कहना है कि शायद हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो मिस्वाक इसलिए करते थे ताकि अपनी पवित्र पत्नियों का चुंबन के द्वारा स्वागत कर सकें l

और इमाम बुखारी ने उल्लेख किया है कि हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-ने कहा: "मैं हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो-को सबसे अच्छी खुशबू लगाया करती थी जो मुझे मिल सकती थी यहां तक कि मैं उनके सिर और दाढ़ी में खुशबू के चिन्ह पाती थी l यह हदीस हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-से कथित है, और यह हदीस सही है, इसे इमाम बुखारी ने उल्लेख किया, देखिए सहीह बुखारी, पेज या संख्या नमबर:५९१८ l

बुखारी में ही यह भी उल्लेखित है कि हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-ने कहा:मैं अल्लाह के पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- के सिर में कंघी करती थी जब मैं माहवारी में होती थी l

इस हदीस में एक शब्द "उरज्जिलु" أرجلहै जिसका अर्थ है: मैं उनके बालों को संवारती थी l

इमाम मालिक से बयान करनेवाले सारे लोगों के शब्द यही हैं l और इसे अबू-हुज़ाफा ने अबू-हिशाम से यूँ उल्लेख किया कि वह हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- के सिर को धोया करती थी जब वह मस्जिद में ही रहते थे तो वह अपने सिर को इनकी ओर बाहर रखते थे और हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- माहवारी के समय में होती थी l इसे दारुक़ुतनी ने भी उल्लेख किया है l

इन हदीसों और इन के इलावा और भी बहुत सारी हदीसों से यह बात स्पष्ट होती है किहज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- धर्मशास्त्र के सीमा में रह कर साफसुथरा रहने और अपने रूप-रंग को संवार कर रखने का ख्याल रखते थे और यह बात अल्लाह सर्वशक्तिमान को भी पसंद है lलेकिन आजकल बहुत सारे मर्द इस का उल्टा काम करते हैं और हो यह रहा है कि या तो बहुत ज़ियादा बनते सवंरते हैं या फिर बनने सवँरने पर बिलकुल ध्यान ही नहीं देते हैं बल्कि अपनी पत्नियों के लिए भी नहीं बनते सवंरते हैं l कुछ लोग तो अजीब और बेढंगा काम भी कर गुज़रते हैं,बनने सवंरने का तो बहुत ख्याल रखते हैं लेकिन फिर भी उनके पास से गंध उठ रहा होता है और वह है धूम्रपान का गंध जो बिलकुल सड़ा हुआ और गंदा गंध होता है, फिर हे प्रिय भाई! आपकी सफाई और सुथराई कहाँ रही? यह तो एक तरफ है दूसरी तरफ यह होता है कि बनने संवरने में बहुत अजीब लापरवाही और कोताही बरती जाती है और लोग पोशाक में बेढंगापन अपनाते हैं और बालों को जैसे तैसे छोड़ देते हैं, नाखून, मूंछें, कांख और अप्रिय बालों को न काटते हैं और न साफ़ करते हैं l और इस तरह गंध में पड़े रहते हैं l याद रहे कि अच्छाई बल्कि सारी अच्छाई और भलाई इसी में है कि बनने संवरने में और नाकनक्शा सही रखने में हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो-का तरीक़ा अपनाया जाए lऔर यह तो महिलाओं का अपने पति पर एक वैध अधिकार है और उसके दिलों को जीतने और उनके प्यार को पाने का सुनिश्चित रास्ता है कियोंकि आत्मा की प्रकृति में यह शामिल है कि वह सफाई सुथराई और सुंदरता को पसंद करती हैl आइए ज़रा हम पहले के मुसलमान पूर्वजों-अल्लाह उन सब से प्रसन्न रहे- के विषय में सुनते हैं कि वे इन बातों का कितना ख्याल रखते थे l

इब्न अब्बास –अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- ने कहा:मैं अपनी पत्नी के लिए उसी तरह संवरता हूँ जैसे वह मेरे लिए संवरती है और मैं उनपर के अपने सारे अधिकार को पूरा पूरा नहीं लेना चाहता हूँ (क्योंकि यदि मैं ऐसा लूँगा ) तो वह भी मेरे ऊपर के सारे अधिकार की मांग करेगी क्योंकि अल्लाह सर्वशक्तिमान ने कहा है :"

(और उनके लिए भी सामान्य नियम के अनुसार वैसे ही अधिकार हैं जैसी उनपर ज़िम्मेदारियाँ हैं l)

खलीफा हज़रत उमर के पास एक आदमी आया उसके बाल बिल्कुल उलझे थे वह पूरा के पूरा धूल में भरा था उस आदमी के साथ उसकी पत्नी भी थी जो कह रही थी :न यह मेरे साथ रहेगा और न मैं इसके साथ रहूंगी न यह मेरे साथ रहेगा मतला वह उससे नफ़रत करती थी lन मैं इसके साथ रहूंगी न यह मेरे साथ रहेगा, लेकिन प्रश्न यह है कि आखिर बात क्या थी? सुनिए! हज़रत उमर को लगा कि पत्नी अपने पति से नफ़रत करती है इसलिए उन्होंने उस आदमी को कहा: जाओ पहले सिर का बाल कटवाओ और नाखुन काटो और स्नान करो, जब वह यह सब कुछ कर के वापिस आया तो उन्होंने उसे अपनी पत्नी के सामने जाने केलिए कहा जब वह उसके पास गया तो वह पहचान नहीं सकी और दूर हट गई फिर वह पहचान गई और उसे स्वीकार कर ली और अपने मुक़द्मा को वापिस ले लीlजी हाँ तलाक़ लेने से रुक गई, इस पर हज़रत उमर ने कहा: उनके साथ इसी तरह किया करो, अल्लाह की क़सम उनको भी तुम्हारा बनना संवरना उसी तरह अच्छा लगता है जिस तरह उनका बनना संवरना तुम को अच्छा लगता हैlयाह्या इब्न अब्दुररहमान अल-हनज़ली ने कहा: मैं मुहम्मद बिन अल-हनफिय्या के पास आया तो वह एक लाल रंग की चादर ओढ़े हुए निकले और उनकी दाढ़ी से (ग़ालिय्ह) खुशबू के बूंद टपक रहे थेlयाद रहे कि "ग़ालिय्ह" कई प्रकार के खुशबुओं का मिक्स्चर हुआ करता था बल्कि सब से अच्छे खुशबुओं के मिलावट से तैयार होता थाlयाह्या का कहना है :मैंने पूछा यह क्या है तो मुहम्मद ने कहा :यह देखो चादर है जो मेरी पत्नी ने मुझ पर डाल दिया और मुझे खुशबू लगा दी, वास्तव में वे भी हम से उसी चीज़ की इच्छा रखती हैं जिसकी हम उनसे इच्छा रखते हैं lइसे इमाम कुरतुबी ने अपनी तफसीर "अल-जामिअ लि अहकामिल कुरआन" में उल्लेख किया हैl

इसलिए याद रखें कि पत्नी भी आप से बनने संवरने की इच्छा रखती है जैसे आप इन बातों की इच्छा रखते हैं , तो हमको साफ़ सुथरा रहने और बनने संवरने का ढंग हमारे प्रिय पैगंबर और उनकी पवित्र पत्नियों से और उनके साथियोँ और उनके बाद के हमारे पूर्वजों से सीखना चाहिएl

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