वापस जाओ और खूब अच्छी तरह अपना वुज़ू करो।

ह़ज़रत उ़मर बिन खत़्त़ाब बयान करते हैं: एक व्यक्ति ने वुज़ू किया तो अपने पांव पर एक नाखून जितनी जगह छोड़ दी। नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने उसको देख लिया और फ़रमाया: "वापस जाओ और खूब अच्छी तरह अपना वुज़ू करो।" वह वापस गया और (अच्छी तरह से वुज़ू करके फिर) नमाज पढ़ी। "

उ़लमा ए किराम वूज़ू की परिभाषा यह बयान करते हैं कि इ़बादत की नियत से शरीर के विशेष अंगों को पानी से धोकर पाकी हासिल करने के नाम वूज़ू है।

वुज़ू को उ़लमा ए किराम त़हारते सुगरा यानी छोटी पाकी कहते हैं। और जनाबत (जिमाअ़ और सेक्स वगैरह), ह़ैज़ (माहवारी) और निफास (बच्चे की पैदाइश के बाद आने वाला खून) से पाकी हासिल करने को त़हारते कुबरा यानी बड़ी पाकी कहते हैं।

और कुछ फर्ज़ हैं और कुछ सुन्नतें, मुस्तह़बात, शर्तें और आदाब हैं जिन्हें उ़लमा ए किराम ने अपनी किताबों में बयान किया है। लिहाज़ा ए मुसलमान भाइयों! अगर आप चाहते हैं कि आपका वुज़ू मुकम्मल और पूरा हो तो आपको उन आदाब का ख्याल रखना ज़रूरी है ताकि आपको ज़्यादा से ज़्यादा सवाब मिले और आपके ईमान में चार चांद लग जाएं।

वुज़ू करते समय इस बात का ख्याल रहे कि उसके अंगों में किसी भी अंग का कोई भी हिस्सा धोने से रह ना जाए वरना तो वुज़ू नहीं होगा और जब वुज़ू नहीं होगा तो नमाज़ भी नहीं होगी।

यहाँ पर ह़दीस़ पाक में जो अच्छी तरह वुज़ू करने का मतलब है वह यह है कि अल्लाह तआ़ला इत़ाअ़त (आज्ञा का पालन करना) और इ़बादत की नियत से वजू में फर्ज़ हर अंग धुल जाए और उस पर पानी बह जाए। लेकिन फ़र्ज़ो की आदाइगी के बाद अच्छी तरह वुज़ू उस समय होगा जबकि उसकी सुन्नतों और मुस्तह़बात वगैरह का भी ख्याल किया जाए।

(याद रहे कि वूज़ू के चार फर्ज़ हैं। और वे यह हैं: (1) कोहनियों समीत दोनों हाथों को धोना। (2) पूरे चेहरे को धोना। (3) कम से कम चौथाई सर का मसह करना। (4) टखनों समीत दोनों पावों को धोना।)

अगर आप चाहते हैं कि आपका ईमान और भी पक्का, आपका दिल पाक व साफ हो, नमाज़ में आपको अल्लाह वालों जैसा मज़ा आए तो वुज़ू के शुरू से आखिर तक तीन बातों का ख्याल रखें। वे ये कि हर अंग धोते समय अल्लाह की नेमत को याद करें और उसका शुक्र अदा करें कि उसने आपको इस अंग की नेमत अता फरमाई और इस अंग से जो गुनाह हुए हैं उन्हें याद करके अल्लाह से माफी मांगे और इस बात का इरादा करें कि उसे गुनाहों से महफूज़ रखेगा। इस तरह से आप अपने वुज़ू से ज़िक्र, शुक्र और अपने गुनाहों से तौबा करके उठोगे। अतः जब पानी के पास बैठो तो उस पर अपने दिल और अपनी ज़ुबान से अल्लाह का शुक्र अदा करो कि अल्लाह ने आपको उसे इस्तेमाल करने की ताकत दी है और जब अपनी हथेलियों को धोएं तो इस पर अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने आपको यह हथेलियाँ दी हैं। उनसे होने वाले गुनाहों को याद करके अल्लाह से माफी मांगें और उसकी बारगाह में सच्ची तौबा करें शायद कि अल्लाह आपकी तौबा क़ुबूल करले।

और जब आप कुल्ली करें तो मुंह और उसकी नेमतों पर अल्लाह का शुक्र अदा करें और ज़बान से होने वाले गुनाहों को याद करते हुए अल्लाह से उनकी माफी मांगें और सच्ची तौबा करें।

इसी तरह चेहरे और हाथों को धोते समय मसह करते समय और पांव धोते समय करें। लिहाज़ा अगर आपने इस तरह वूज़ू किया जैसा कि मैंने आपसे ऊपर बयान किया तो यक़ीनन आप जान लेंगे कि यही सही वूज़ू है। और अगर वुज़ू इस तरह का न हो तो वह गाफिलों का वुज़ू है। और आपको अच्छी तरह से पता चल जाएगा कि पाकी आधा ईमान है।

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