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हज़रत अबू हुरैरा (अल्लाह उन से प्रसन्न हो) से रिवायत है वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) ने फरमाया : कमज़ोर मोमिन की तुलना में शक्ति शाली (ताक़तवर ) मोमिन अधिक अच्छा और अल्लाह को अधिक प्रिय है और हर एक में अच्छाई है, और जो चीज़ तुम्हें लाभ दे उसके लालची बनो, और अल्लाह से सहायता मांगो और थक कर बेठ न जाओ, और तुम्हें कोई मुसीबत पहुंचे तो यह न कहो : काश मैं ऐसा कर लेता, बल्कि यह कहो: यह अल्लाह के फैसले से है, उसने जो चाहा वही किया, क्योंकि "

काश " शब्द शैतान कहलवाता है।

यह उन महान आज्ञाओं और वसीयतों में से एक है जिनकी हर मुस्लिम को अपने धर्म और अपनी दुनिया के मामलों आवश्यकता होती है और वह जहां कहीं भी हो इनके बिना नहीं रह सकता, क्योंकि यह सामान्य रूप से एक सही शैक्षिक और तरबियती पाठ्यक्रम है, जो पवित्र कुरान से लिया गया है जैसा कि नबी (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) के अन्य आज्ञाएं और वसीयतें हैं।  

शक्तिशाली वह मजबूत मोमिन का मतलब यह है कि , अपने विश्वास और ईमान में मज़बूत हो, अपने रब (अल्लाह) के आदेश का पालन करने और अपने धर्म का समर्थन करने में मज़बूत हो, सत्य को जिताने और झूठ को हराने में मज़बूत हो, ज्ञान और शरीर में मजबूत हो, कठिनाइयों का सामना करने और परेशानियों को सहने के लिए मज़बूत और शक्तिशाली हो, मुसीबतों में सब्र करने वाला हो, अच्छी और बुरी क़ज़ा व क़द्र (भाग्य ) से राज़ी हो, और इनके अलावा उसमें वे अन्य गुण और विशेषताएं भी हों जिनके द्वारा मोमिनों में अंतर होता है जैसे कि दृढ़ता व दृढ़ संकल्प , साहस व बहादुरी, और ईमानदारी व सच्चाई यहाँ तक कि उसमें इमान की सभी शाखाएं और विशेषताएं इकट्ठा हो जाऐं।

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