(तुम अपनी फिफ्र रखो) इस आयत के बारे में तुम क्या कहते हो? तो उन्होंने कहा: अल्लाह की क़सम तुमने इसके बारे में एक अच्छे जानने वाले व्यक्ति से पूछा है, मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) से इसके बारे में पूछा था, तो उन्होंने फ़रमाया: "बल्कि तुम अच्छाई का आदेश दो और बुराई से मना करो, यहां तक कि जब तुम देखो की लोग लालच और ख्वाहिश नफ़सानी के पीछे भाग कर रहे हैं, दुनिया को (आखिरत व परलोक के प्रति) अच्छा समझ रहे हैं और हर व्यक्ति अपनी राय व विचार से खुश हो रहा है, तो (ऐसी स्थिति में) तुम केवल अपने आप की फिक्र करो और जनता को जो कर रही है करने दो, क्योंकि तुम्हारे बाद सब्र (सहने) के दिन आएंगे, उनमें सब्र करना इतना मुश्किल होगा जैसे कि हाथ में अंगारे रखना, उस समय (कुरआन व सुन्नत के अनुसार) एक अ़मल करने वाले व्यक्ति को तुम जैसे पचास लोगों के अ़मल करने के बराबर स़वाब व पुण्य मिलेगा। "